Saturday, 22 April 2017

बेवफाई वफ़ा में बदलेगी जरूर



बेवफाई वफ़ा में बदलेगी जरूर एक बार उन्हें मेरे करीब आने तो दो,
वो खुद ही संभालेंगे मुझे एक बार मुझे टूट कर बिखर जाने तो दो,
इतनी नाजुक नहीं है हमारे इस अनमोल रिश्ते की डोर जनाब,
एक बार उनको मेरे लिए अपनी नजरे झुकाने तो दो,
वो ही आएंगे लेने हमेशा की तरह मुझे अपने साथ,
एक बार सिद्दत से मेरे को रूठ जाने तो दो,
सारा जहाँ गवाह बनेगा हमारी मोहब्बत के अंजाम का,
एक मुझे अपनी आखों में आसुओ को लाने तो दो,
नाज है हमे हमारे रिश्ते पे और रहेगा भी,
यकीं होगा सबको बस एक बार उन्हें अपना प्यार जताने तो दो,

Thursday, 20 April 2017

हमारा हिंदुस्तान



आज देखा माता की चौकी को एक मुस्लिम दे रहा था सहारा,
वो अपना मजहब भूल कर सिर्फ पैसे था कमा रहा,
फ़िक्र थी उसको किसी भी लड़ाई दंगे की जनाब,
वो तो बड़ी ख़ुशी से माता के कदमो में था फूलो को  बिछा रहा,
माता की चौकी के पीछे ही चल रहा था एक जनाजा भी,
रोक कर माँ की चौकी को सारे हिंदू ने जनाजे को दिया सहारा भी,
देख कर इंसान की ऐसी अदभुत सोच का नजारा,
मन बाग़ बाग़ हो गया एक बार फिर से हमारा,
हर किसी के मन से अगर ये जात धर्म का झगड़ा मिट जाए,
वो दिन दूर नहीं जब ये भारत फिर से हिंदुस्तान बन जाये,

Tuesday, 18 April 2017

उनकी आजमाइश

वक़्त की आजमाइश में वो खुद की नुमाइश कर बैठे,
जिसको पाने की हम दिन रात तमन्ना किये हुए थे,
वो उसी आफताब को पाने की ख्वाहिश कर बैठे,
बहुत समझाया उनको ज़माने की नियत का कायदा,
मगर वो उस जहाँ की ही फरमाइश कर बैठे,
जिसको कभी न देखने की हम कसम खाये बैठे थे,
उसी जन्नत के नूर की वो अपने दिल में गुंजाइश कर बैठे,

Thursday, 13 April 2017

तुम्ही बता दो

कितना और कब तक तुम्हे आजमाऊ तुम्ही बता दो,
हमेशा तो झुकाया है सर तुम्हारी ही खिदमत में,
क्या खुद भी टूट कर बिखर जाऊ तुम्ही बता दो,
इत्मिनान कब होगा तुम्हे मेरी बातो पे मेरे हमदम,
क्या सदा के लिए खामोश हो जाऊ तुम्ही बता दो,
आफताब सी लगने लगी है मुझे तुम्हारी मोहब्बत,
क्या धरती सा मैं भी बन जाऊ तुम्ही बता दो,
शख्सियत मेरी गर चुभती हो तो बताओ बेहिचक,
क्या अपनी शोहरत भी गवां दू तुम्ही बता दो,
कुछ भी और कोई भी याद नहीं मुझे तेरे सिवा,
क्या तुझको भी भूल जाऊ तुम्ही बता दो,
हर जतन किया है तुझे पाने का मैंने जाना,
और कैसे ये रिश्ता कैसे निभाऊ तुम्ही बता दो,
सब्र नहीं तुमको मंजिल तक पहुंचने तक का भी,
कैसे मै कदम से कदम मिलाऊ तुम्ही बता दो,
तुम तो बैठे हो सब गवाकर एक हारे हुए मांझी की तरह,
कैसे मैं यू खुद को जिताऊ तुम्ही बता दो,
तुम्हे तो फर्क नहीं है मेरे होने न होने का,
मैं तुमसे कैसे अचानक से दूर हो जाऊ तुम्ही बता दो,
इतने कैसे बेफिक्रे हो गए हो तुम ऐवी ही,
अब तुम्हारे बिना जीवन कैसे बिताऊ तुम्ही बता दो,
बेवजह ही तुमने छोड़ा है मुझे और मेरी मोहब्बत को,
मैं कैसे इस कमबख्त दिल को समझाऊ तुम्ही बता दो,

Sunday, 9 April 2017

हमारा अंदाज

हम कोई बड़ा आसमां नहीं जो तुम हमे छूने को भी मोहताज़ हो,
बस खुद को थोड़ा बदल कर देखो,
हम कोई तेज़ धूप का झुलझुलाता सावन नहीं जो तुम्हे तपन का एहसास हो,
बस मेरे लिए थोड़ा सा मचल कर देखो,
हम कोई मुकदमा नहीं किसी गहरे गुनाह का जो तुम्हे हमपे न विश्वास हो,
बस मेरे लिए थोड़ा सा संभल कर देखो,
हम कोई रोशनी नहीं रात की जो सिर्फ अँधेरे में तुम्हारे साथ हो,
बस तुम एक बार मेरे लिए तड़प कर देखो,

Thursday, 6 April 2017

KISSA

लड़ते नहीं हम तुमसे यू ही दानिश्ता,
ये भी हमारी मोहब्बत का एक हिस्सा है,
यादे तो बहुत है खुशियों की मेरे हमदम,
मगर ये लड़ना भी एक यादगार किस्सा है,
जैसे चाँद के बिना रात और कोई अधूरी बात,
वैसे ही हमारा ये तुमपे इख़्तियार सच्चा है,

Monday, 3 April 2017

मेरा गुमान

छिन गया वो इख़्तियार मुझसे जिसपे कभी हुआ करता था गुमान,
गवारा न था मुझे तुझसे दूर रहना पलक झुकने से उठने तक भी,
मगर आज चुराते क्यों हो नजरें मुझसे ऐसे जैसे मैं हूं कोई अंजान,
बस इतनी सी इक्तला दे दो मुझे की तुम मुस्कुराते हो अब भी क्या,
क्योंकि जुदा होते ही तुमसे मेरी तो नींदों के साथ ही चली गई है मुस्कान